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धमतरी क्षेत्र में उच्च शिक्षा के विकास ले लिये महाविद्यालय की आवश्यकता का अनुभव कर आदर्श शिक्षण समिति, धमतरी ने 1963 में नूतन एवं वाणिज्य महाविद्यालय की स्थापना की ! नूतन महाविद्यालय में विज्ञान के अध्ययन की सुविधा न होने के कारण लाल बहादुर शिक्षण समिति, धमतरी ने धमतरी विज्ञान, कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय की स्थापना 1968-69 में की ! नूतन महाविद्यालय में अर्थशास्त्र में स्नातकोत्तर की कक्षायें 1972-73 से प्रारंभ हुई ! इन दोनों संस्थाओं को वित्तिय संकट से उबारने के लिये 01 जनवरी 1980 को नगरपालिका परिषद धमतरी ने इन महाविद्यालयों का अधिग्रहण किया ! आगे चलकर म.प्र. शासन, उच्च शिक्षा विभाग ने 09 जून 1981 को इन महाविद्यालयों का अधिग्रहण कर इन्हें एकीकृत किया ! इस प्रकार शासकीय महाविद्यालय धमतरी अस्तित्व में आया !


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प्रेस विज्ञप्ति

 

रोचक तथ्य

  • ईश्वर की पूजा करना अन्तर्निहित आत्मा की उपासना हैं धर्म की प्रत्यक्ष अनुभूति हो सकती है। क्या तुम इसके लिए तैयार हो ? क्या तुम यह चाहते हो ? यदि हां, तो तुम उसे अवश्य प्राप्त कर सकते हो, और तभी तुम यथार्थ धार्मिक होगे। जब तक तुम इसका प्रत्यक्ष अनुभव नहीं कर लेते, तुममें और नास्तिकों में कोई अन्तर नहीं। नास्तिक ईमानदार है, पर वह मनुष्य जो कहता हैं कि वह धर्म में विश्वास करता है, पर कभी उसे प्रत्यक्ष करने का प्रयत्न नहीं करता, ईमानदार नहीं है।

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  • ईश्वर की पूजा करना अन्तर्निहित आत्मा की उपासना हैं धर्म की प्रत्यक्ष अनुभूति हो सकती है। क्या तुम इसके लिए तैयार हो ? क्या तुम यह चाहते हो ? यदि हां, तो तुम उसे अवश्य प्राप्त कर सकते हो, और तभी तुम यथार्थ धार्मिक होगे। जब तक तुम इसका प्रत्यक्ष अनुभव नहीं कर लेते, तुममें और नास्तिकों में कोई अन्तर नहीं। नास्तिक ईमानदार है, पर वह मनुष्य जो कहता हैं कि वह धर्म में विश्वास करता है, पर कभी उसे प्रत्यक्ष करने का प्रयत्न नहीं करता, ईमानदार नहीं है।

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महाविद्यालय के गौरव

  • कु. गीतांजलि
    एम.एस.सी.( होम साइंस )
  • कु. शिल्पा लालवानी
    बी.सी.ए. ( तृतीय वर्ष )

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अनमोल वचन

विश्व की समस्त शक्तियां हमारी हैं। हमने अपने हाथ अपनी आंखों पर रख लिये हैं और चिल्लाते हैं कि चारों ओर अंधेरा है। जान लो कि हमारे चारों ओर अंधेरा नहीं है, अपने हाथ अलग करो, तुम्हे प्रकाश दिखाई देने लगेगा, जो पहले भी था। अंधेरा नहीं था, कमजोरी कभी नहीं थी। हम सब मूर्ख हैं जो चिल्लाते हैं कि हम कमजोर हैं, अपवित्र हैं।”

स्वामी विवेकानंद || बल, शक्ति और विश्वास ||

 

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